अब्दुल हमीद उनके बलिदान को कृतज्ञ राष्ट्र का सलाम

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10 सितंबर 1965, समय सुबह 8 बजे : खेमकरण के चीमा गाँव में पाकिस्तान के टैंक अंदर की तरफ़ आने लगे। चीमा की कमांड में थे हवलदार अब्दुल हमीद।

हलचल की भनक लगते ही वीर हमीद अपनी भारी बंदूक़ से लैस जीप ले कर टैंकों की तरफ़ बढ़े। एक उचित स्थान देख कर जीप लगाई और दुश्मन टैंक पर हमला बोल दिया। पहले ही हमले में दुश्मन दल का सबसे प्रमुख टैंक उड़ा दिया। दुश्मन की ओर से भी फायरिंग शुरू हो गई लेकिन उसकी परवाह किए बिना हमीद निशाना लगाते रहे।

चंद मिनटों में ही दूसरा दुश्मन टैंक भी धराशायी हो गया। इसके बाद दुश्मनों का हमला तेज़ हो गया। हमीद खुद को बुरी तरह घायल होने से नहीं रोक पाए। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने फायरिंग नहीं रोकी। थोड़ी ही देर में एक और टैंक को ढेर कर दिया। तभी वो एक दुश्मन गोले का शिकार हो गए और परम बलिदान को प्राप्त हुए।

कमांडर का हौसला और शहादत देख कर बाक़ी साथियों ने जोरदार धावा बोला और दुश्मन टैंकों के दल को अंदर नहीं आने दिया।

अब्दुल हमीद
अब्दुल हमीद

इस बलिदान के लिए वीर हमीद को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। आज, उनके शहादत दिवस पर उनके बलिदान को कृतज्ञ राष्ट्र का सलाम