नायक और खलनायक में क्या अंतर होता है ,,

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संसार हमेशा विजेता को नायक के रूप मे देखता है ओर पराजित को खलनायक हम सरल शब्दो मै कहे तो यह बोल सकते है इतिहास मे या तो कोई विजेता होता है या पराजित उसी को हमने नायक खलनायक के रूप मै स्वीकार कर लिया है ..

जैन रामायण (पद्मपुराण) मेने पढी ओर महसूस किया कि इसमे लगभग 200 पेज मे रावण का वर्णन है ओर बमुश्किल केवल 20, 25 पृष्ठ मे राम का ..

ग्रंथ मे लिखा रावण बहुत बलशाली था उसके चलने से धरती कांपती थी सूर्य चंद्र उसके अधीन थे ओर बहुत बहुत अतिशयोक्ति अलंकार मै उसका वर्णन है समझ नही आया इसे हम रामायण कहै या रावणायण ..

लेकिन जब आखिर के दस पेज पढे तब समझ मे आ गया कि लेखक क्या बताना चाह रहा है इतने बलशाली को बृदिमान को राम ने मार दिया तो बड़ा कोन रावण या राम ..
यदि लेखक यह कहता कि रावण एक पिददी राजा था ड़र के मारे छुप जाता था ओर बहुत ड़रपोक था ओर ऐसे व्यक्ति को राम ने मार दिया तो शायद इतिहास मे राम का स्थान देवता के रूप मै अंकित नही होता इसलिए लेखक ने जानबूझकर रावण का वर्णन व्यापक किया ताकि राम की नायक छबि उभर सके ..

नायक खलनायक

इतिहास का यह सदैव तकाजा रहा है नायक की छबि उभारना हो तो खलनायक को बहुत क्रूर दिखाना ताकि नायक उभर के सामने आ सके..
पृथ्वीराज चौहान केवल एक बार ही मुहम्मद गोरी को पराजित कर पाये थे किंतु इतिहास मे 11बार क्षमादान का उल्लेख होता है..

ताकि नायक खलनायक के तुलना मै बढकर दिखे ..
वैसे भी जीवन मे दो चार खलनायक जरूरी है नही तो जीवन सपाट रास्ते पर चलता रहता है..

यदि गली मे दो चार सूकर न हो तो गली साफ कैसे रहेगी..

नायक और खलनायक में क्या अंतर होता है ,, -सचिन जैन