किसानो के लिए केंचुए है वरदान

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किसानो के लिए केंचुए है वरदान

किसान अपने खेतो में वो सब कुछ करता है जो उसकी फसल एवं उत्पादन के लिए आवश्यक है पर वह कुछ गलतियों उनके द्वरा हो जाती है जिससे उत्पादन में कमी और मिट्टी की गुणवत्ता पर बुरा असर पढता है मिट्टी की गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए हमें मिट्टी को पलते रहना चाहिए, मिट्टी ऊपर की मिट्टी नीचे नीचे की ऊपर ऊपर की नीचे ,नीचे की ऊपर ये केंचुआ ही करता है, केंचुआ किसान का सबसे अच्छा दोस्त है, एक केंचुआ साल भर जिंदा रहे तो एक वर्ष मे 20 मीट्रिक टन मिट्टी को उल्ट पलट कर देता है और उतनी ही मिट्टी को ट्रैक्टर से उल्ट पलट करना पड़े तो हजारो रूपये का डीजल लग जाता है! मतलब केंचुआ किसान का लाखो रूपये के बराबर काम करता हैं !  इसलिए केंचुए किसान के दोस्त माने जाते है गोबर खाद डालने से फायदा क्या होता है ? रसायनिक खाद से बहुत से केंचुआ मर जाते है गोबर का खाद डालो तो केंचुए खेतो में भरपूर रहते है, क्योंकि गोबर केंचुए का भोजन है केंचुए को भोजन मिलता रहता है तो वह अपनी जन संख्या बढ़ाता है और इतनी तेज बढ़ाता है, की आप अंदाजा भी नही लगा सकते हो! किसानो के लिए केंचुए है वरदान एक एक केंचुआ 10 हजार से 50 हजार तक बच्चे पैदा करके मरता है एक प्रजाति का केंचुआ तो 1 लाख बच्चे पैदा करता है! तो वो एक ज़िंदा है तो उसने एक लाख पैदा कर दिये अब वो एक एक लाख आगे एक एक लाख पैदा करेंगे करोड़ो केंचुए हो जाएंगे, आपने अगर गोबर का खाद डालना शुरू किया तो खेतो में उनकी संख्या में बढोतरी होगी !

जमीन में पानी का लेवल

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Water lavel

अगर खेतो में ज्यादा केंचुआ होंगे तो वह पानी के लेवल को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते है अगर ज्यादा मिट्टी उलट पलट होगी तो जमीन में छोटे – छोटे  छिद्र की संख्या भी ज्यादा होगी और मिट्टी ठोस नही होगी होंगे तो बारिश का सारा पानी जमीन मे चला जाएगा, पानी मिट्टी मे चला गया तो फालतू पानी नदियो मे जाने से बच जाएगा, जिससे जमीन का कटाव नही होगा, जमीन में पानी का लेवल बना रहेगा, नदियो मे फालतू पानी नहीं गया तो बाढ़ आने की संभावना कम होगी पानी जमीन की गर्त में पहुंचेगा समुद्र मे फालतू पानी जाने से बच जाएगा, जिससे किसानो और देश को करोड़ो रूपये का फायदा हमें और हमारे देश को होगा इसलिए किसानो को गोबर का खाद अच्छी तरह बना कर खेत में डालना चाहिए जिससे आपका उत्पादन और मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहेगी !

बनाने का तरीका

आम तोर पर किसान कूड़ा – कचरा डालने वाले धुड़े मे गोबर जमा कर देते है, उसमे घर का रसायनिक कचरा भी मिला देते है, जिससे गोबर को खाद में बदलने वाले जीवाणु मर जाते है जिससे खाद सही तरीके से बन नही पाता है, और हमारा गोबर का खाद कच्चा रह जाता है वो साल भर सूखता रहता है जिससे उसकी गुणवत्ता में कमी आ जाती है वो उतना  लाभ नहीं देता ! तो गोबर को हमेशा गीला डालना चाहिए ताजा डालना चाहिए, उसमे नमी की मात्रा हमेशा रहनी चाहिए अगर गर्मी या धूप अधिक रहती हो तो कुछ दिनों के अन्तराल से पानी की कुछ मात्रा उसमे दाल देना है, जिससे उसमे नमी की मात्रा बनी रहे जिससे केंचुए और जीवाणु गोबर को खाद में बदलते रहे.

खाद से फायदे

Kechua khaad
Kechua khaad

जब ये खाद तैयार हो जाएगा तब उसमे quality होगी, क्योंकि इसमे कैल्शियम, आइरन, माइग्निशियम, और ऐसे 18 पोषक तत्व होंगे जो मिट्टी को आवश्यक रूप से चाहिए होंगें, बात करे अन्य खाद की जैसे यूरिया, DAP की तो ये अपनी जगह तो ठीक है, पर रसायनिक खाद है, मीट्टी के लिए कैल्शियम सबसे मुख्य आधार है क्योंकि खेत मे कैल्शियम होगा तो पौधो मे होगा, पौधो मे होगा तब फल मे भी होगा, फल मे होगा तो हमारे भोजन मे होगा, हमारे भोजन मे होगा तो शरीर मे निश्चित रूप से होगा शरीर मे होगा तो हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, ये सारी श्रंखलायें गोबर की खाद से ही बनेंगी, हमेशा ध्यान रखे जो गोबर उपयोग में लेना है वो देशी गाय का ही होना चाहिए! विदेशी, जर्सी गाय वाले गोबर से उतना लाभ नहीं मिलता है!

जैविक खाद बनाये (एक एकड़ खेत के लिए)

पलास्टिक के ड्रम या बड़े से कुण्ड में नीचे लिखी चीजों को अच्छी तरह मिला लें, 20 किलो गोबर, 20 लीटर मूत्र, 1 किलो गुड़ (कैसा भी चलेगा, जो सड़ गया हो उपयोग का ना हो तो वो ज्यादा अच्छा है) अब इसमे 1 किलो पिसी हुई दाल या चोकर (कैसा भी चलेगा, आपके उपयोग का ना हो तो ज्यादा अच्छा है) और आखरी मे डालनी है 3 किलो मिट्टी किसी भी पुराने पेड़ के नीचे की पीपल, बरगद  (पीपल ,बरगद के पेड़ 24 घंटे आक्सीजन छोड़ते है ! जिससे जीवाणुओ की संख्या काफी ज्यादा होती है, यही जीवाणु खेत को चाहिए होते है, इन को आपस मे मिला दो हाथ से या किसी डंडे से, मिलाने मे समस्या आए तो थोड़ा पानी डाल दो पानी थोड़ा सा ही डालना है, अब इसको 15 दिन तक छाँव में रखो, पेड़ की छाँव के नीचे ज्यादा बढ़िया होगा, धूप मे बिलकुल न रखे, और रोज सुबह शाम एक बार इसे मिला दो, 20 दिन बाद ये खाद बन कर तैयार हो जाएगा इस खाद करोड़ो करोड़ो सूक्ष्म जीवाणु होंगें वो हमने जो मिट्टी डाली ना उसी के जीवाणु अपनी संख्या बढ़ाएँगे, जिस दिन मिट्टी डाल कर रखा था अगर उस दिन 1 लाख जीवाणु है तो 15 दिन बाद इनकी संख्या 100 करोड़ को पार कर जाएगी!

खेत में डालने का तरीका

अब इस खाद (जीवाणु घोल) को खेत मे डालना है और डालने से पहले इसमे पानी मिलना है पानी जितना गोबर था उसका 9 या 10 गुना पानी मिलाना है 10 किलो गोबर था तो 100 लीटर पानी तो पानी मिलाने के बाद ये पूरा घोल तैयार हो जाता है और इसे बस अब एक एकड़ के खेत मे छिड़कना है जैसे मिट्टी दबाने के लिए हम पानी छिड़कते है वैसे ही छिड़कना है ! जब ये घोल खेत में जाएगा तो ये जीवाणु मिट्टी मे मिल जाएंगे और मिट्टी मे सारा काम ये जीवाणु ही करते हैं ! आपको शायद पता होगा है ये जीवाणु क्या कम करते है ?

पोधे की जड़ को नाइट्रोजन चाहिए तो ये जीवाणु के द्वरा ही उपलब्ध होती है!

पोधे की जड़ को कैल्शियम चाहिए तो ये जीवाणु उपलब्ध करवाते है !

पोधे की जड़ को आयरन चाहिए ये जीवाणु के द्वरा ही उपलब्ध होती है!

अर्थात फसल को जितने सूक्ष्म तत्व चाहिए और पोधे के फल से होते हुए हमारे शरीर को भी चाहिए तो ये जीवाणु ही है जो ये सब उपलब्ध करवाते हैं ! तो जिस पोधे एवं मिट्टी को जीवाणु ज्यादा मिलेंगे तो उसकी बढ़त ज्यादा होगी उत्पादन छमता बढेगी!

मिलाने सही समय

आप जब खेतो की जुताई (बखराई) करते है बीज बोने से पहले जब आप खेत की जुताई करे ठीक उसके अगले दिन डाल दीजिये, बीज बोने के 21 दिन बाद फिर डाल दो ! आप मोटी सी बात याद रखो हर 21 दिन बाद डाल दो तो अच्छा रहेगा ये आप के ऊपर निर्भर करता है,

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