Motivesnal Hindi Shayri

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सारा जहा उसी का है
जो मुस्कुराना जानता है
रोशनी भीउसी की है जो शमा
जलाना जानता है
हर जगह मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे है।
लेकीन इश्वर तो उसीका है जो
“सर” झुकाना जानता है!





दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी।
दरिया -: खुद अपना पानी नहीं पीता।
पेड़ -: खुद अपना फल नहीं खाते।
फूल -: अपनी खुशबु अपने लिए नहीं बिखेरते।
मधुमक्खी -: खुद अपना शहद नही खाती!
मालूम है क्यों..??
क्योंकि दूसरों के लिए ही जीना ही असल जिंदगी हैं।

 

 

 

राम राम है भोर की,
राम रखेंगे खैर..
अपनी सबसे मित्रता,
नहीं किसी से बैर..
सारे अपने काम के,
सबका अपना मोल..
जो संकट में साथ दे,
वो सबसे अनमोल..

 

 

 

खिलौना समझ कर खेलते जो रिश्तों से
उनके निजी जज्बात ना पूछो तो अच्छा है
बाढ़ के पानी में बह गए छप्पर जिनके
कैसे गुजारी रात ना पूछो तो अच्छा है





दीपक मिट्टी का है
या सोने का,
यह महत्वपूर्ण नहीं है;
बल्कि वो अंधेरे में
प्रकाश कितना देता है
यह महत्वपूर्ण है।

उसी तरह मित्र
गरीब है या अमीर है,
यह महत्वपूर्ण नहीं है।
बल्कि वो आपकी
मुसीबत में आपका
कितना साथ देता है
यह महत्वपूर्ण है।

 

 

 

 

 

एहसास अलग होता है !!

इस दुनिया में सब का !
व्यवहार अलग होता है !!

आँखें तो सब की !
एक जैसी ही होती है !!

पर सब का देखने का !
अंदाज़ अलग होता है !!

 

 

 

जब से सभी के अलग अलग मकान हो गए….

पुरा बचपन साथ बिताने वाले भाई भी

आज एक दूसरे के मेहमान हो गए…

 

 

 

चैन तो छिन चुका है अब बस जान बाकी है,
अभी मोहब्बत में मेरा इम्तेहान बाकी है,

मिल जाना वक़्त पर पर ऐ मौत के फ़रिश्ते,
किसी को गिला है किसी का फरमान बाकी है।

 

iiiiiiiiiiiiiiii