motivational stories- इतिहास मै कहां कोरवो का स्थान है ओर कहां भरत का

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“युद्ध किस तरह का”

प्रेम सदा माफ़ी माँगना पसंद करता है, और अहंकार सदा माफ़ी सुनना पसंद करता है..

जब भगवान श्रीकृष्ण दुर्योधन के समक्ष संधि प्रस्ताव लेकर जा रहे थे ,तब सबने उन्हे यह कहते हुए मना किया कि दुर्योधन किसी भी कीमत पर नही मानेगा तब माधव ने कहां कि मुझे यह बात मालूम है, किंतु मे अपने कर्त्तव्य से विमुख नही हो सकता है ओर इतिहास मै मुझे इस बात के लिए नही जाना जाये कि मेने यह भयानक संग्राम करवाया था..बल्कि मेने यह मानवता के कूर अपराध से बचाने का प्रयास किया था..

इतिहास गवाह है युद्ध हुआ बहुत गंभीर हुआ भाई भाईयो के बीच हुआ क्योकि अहंकार ने झुकने से इंकार कर दिया ओर यह भीषण युद्ध मे संपूर्ण कोरव वंश का विनाश हो गया..

युद्ध क्यो राजगद्दी के लिए ऐसा ही ऐतिहासिक युद्ध “राम” और “भरत” के बीच भी हुआ वो भी महाभारत से भी गंभीर ओर शस्त्रो के साथ ओर राजगद्दी के लिए एक तरफ राम का पितृ *कर्तव्य* ओर भरत की भाई *प्रेम भावना* के बीच ओर यह युद्ध मै भरत ने राम को हरा दिया ओर अंत मै उनकी” चरण पादुका “को ही राज सिहांसन मै बिठा दिया..

अब इतिहास मै कहां कोरवो का स्थान है ओर कहां *भरत* का आप खुद मूल्यांकन करे तब बेहतर होगा..बस इतना ही तुलसीदास जी ने कहा है..

(तुम मम प्रिय भरत सम भाई)

Credit –  Sachin Jain