Steve Jobs relations with India – जॉब्स को जीवन का ज्ञान भारत से ही मिला था

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Apple’s owner Steve Jobs was inspired from India

आप सभी ने दुनिया की विख्यात कंप्यूटर और मोबाइलकंपनी एप्पल के बारे में तो सुना ही होगा, क्या आप जानते हैं कि इसके संस्थापक स्टीव जॉब्स को जीवन का ज्ञान भारत से ही मिला था, स्टीव जॉब्स 24 फरवरी 1955 को कैलिफोर्निया के सेन फ्रांसिस्को में पैदा हुए थे। कहने को तो जॉब्स हमारे बीच आज नहीं है, लेकिन अपने काम के जूनून के जरिए वो आने वाले दशकों तक करोड़ों दिलों में राज करते रहेंगे।

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5 अक्टूबर 2011 कैंसर की बीमारी से उनका निधन हो गया। शायद कम लोग जानते हैं कि जीवन का ज्ञान उन्हें भारत से मिला था। हम आपको बता दे की साल 1974 में अपने चमत्कारों के लिए विश्व विख्यात करौली बाबा के विचारों से प्रभावित होकर वे कुछ बड़ा पाने की ख्वाहिश में वे भारत आए थे।

वे अपने दोस्त के साथ नैनीताल स्थित नीम करौली बाबा के कैंची आश्रम पहुचें लेकिन जब वह वहां पहुंचे तो बाबा की मृत्यु हो चुकी थी। जिससे वह काफी मायूस हुए लेकिन, वहां उन्हें ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ एन योगी’ नामक एक किताब मिली। इस किताब को उन्होंने कई बार पढ़ा। इसी किताब के बारे में स्टीव जॉब्स ने बताया था कि इसने उनके सोचने का नजरिया और विचारों को बदल दिया।

जीवन में बदलाब

“जब वह 17 साल के थे, तो उन्होंने एक कोटेशन पढ़ा था, जो कुछ ऐसे था, आप हर दिन यह सोचकर जियो कि आज आखिरी दिन है, तो एक दिन ऐसा जरूर आएगा, जब आखिर दिन भी आएगा। इस बात ने उन्हें बहुत प्रभावित किया। 33 सालों से वह रोज सुबह शीशे में अपना चेहरा देखकर यही सोचते थे, यदि आज मेरा आखिरी दिन है, तो मुझे वो करना चाहिए जो मैं चाहता हूं। कई दिनों तक उन्हें अपने सवाल का जवाब नहीं मिला। वे जल्दी मर जाएंगें, यह सोच उन्हें जीवन में और ज्यादा काम करने की प्रेरणा देती थी।

रोग ग्रस्त जीवन संघर्ष का प्रेरक

जब उन्हें कैंसर का पता चला डॉक्टर ने उन्हें बताया कि वे तीन से छह महीने तक ही जीवित रह पाएंगे। उन्हें कहा गया की अपने परिवारवालों को अपनी बीमारी और अपने काम के बारे में सब कुछ बता दें। उन्होंने अपना इलाज करवाया, सर्जरी हुई। उन्होंने बहुत ही नजदीक से मौत को देखा। उनका कहना था की कोई भी मरना नहीं चाहता, लेकिन मौत एक सच्चाई है, जिसका सामना सभी को करना है। हम सभी के पास बहुत कम समय है, इसलिए किसी की बात सुनने की बजाए, अपने अंदर की आवाज को सुनो और जो आवाज आती है, उसे मानो और आगे बढ़ो।”

 

यह थी एप्पल कम्पनी के संथापक स्टीव जॉब्स प्रेरणादायक कहानी